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बिहार में मज़हबी आस्था के लिए 15 साल के बच्चे की हत्या, लड़के को हिन्दू होने का खामियाजा भुगतना पड़ा

 

गोपालगंज बिहार – आपके जीवन में एक ऐसा भी समय आता है जब आप दर्द को देखते – देखते आप दर्द को महसूस करना बंद कर देते हैं । आपकी प्रतिक्रिया उस दर्द के प्रति संवेदन हीन हो जाती है और आप उस दर्द के साथ जीना सीख लेते हैं । ऐसा ही कुछ हो रहा है हमारे इस हिन्दुओ के देश में हिन्दू समाज के साथ, लोगों ने दर्द को महसूस करना बंद कर दिया है ।

हम बात कर रहे हैं बिहार के गोपाल गंज जिले की । बिहार के इस गोपाल गंज जिले में जब राजेश जयसवाल के बेटे को एक मस्जिद की शक्ति बढ़ाने के लिए कुर्बान कर दिया गया तो कोई शोर नहीं हुआ । मीडिया में भी इस बच्चे के न्याय के लिए कोई आवाज़ नहीं सुनाई दी । अब हमने जीना सीख लिया अब हमें पता चल चुका है कि भारत में हिन्दू होना अभिशाप है भारत में हिन्दुओ के लिए आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं हैं ।

बिहार के गोपाल गंज जिले के कटेया थाना क्षेत्र में एक गाँव पड़ता है बेलाडीह वहाँ एक घटना घटती है गाँव में पकौड़े बेचकर अपना परिवार चलाने वाले राजेश जयसवाल के 15 वर्षीय पुत्र कि हत्या करके एक नदी में डाल दिया गया । ऐसी घटनाएँ हमारे देश में होती रहती हैं और अक्सर अखबार के बीच में अपराध जगत कि खबरों में ऐसी खबरे छपती भी रहती हैं । न्यूज़ चैनल पर भी या तो सुपरफास्ट 100 न्यूज़ मे आती है या फिर क्राइम रिपोर्ट में लेकिन यह खबर कहीं भी किसी भी अखबार में नहीं छपी और न ही किसी न्यूज़ चैनल पर दिखाई गयी। यह ख़बर मानो एक गुमनाम ख़बर कि तरह से दब ही गयी थी । और यह ख़बर दिल्ली तक पहुँचती भी नहीं अगर ऑप इंडिया ने इस ख़बर के अपने आर्टिकल में छापा न होता । लेकिन इस ख़बर कि सबसे विशेष बात यह है कि यह मामला धर्म से जुड़ा हुआ है और धर्म से जुड़ी हुई ऐसी खबरें तो महीनों तक टीवी पर चलती रहती हैं जैसे राम – रहीम ,आसाराम की ख़बर देख लो या अखलाख की और तबरेज़ तो यहीं बिहार से ही था न ऊन लोगों की खबरें तो महीनों तक चलीं टीवी पर लेकिन इस ख़बर की ख़बर मीडिया को कैसे नहीं लगी। मीडिया गई भी थी ख़बर को कवरेज करने रोहित के माता – पिता बहन सबके इंटरव्यू भी लिए लेकिन न्यूज़ चैनल पर चलाया नहीं और ना ही उसे किसी अखबार में छापा क्योंकि रोहित हिन्दू था , ना तो उसकी ख़बर बिकती और न ही विदेशों से फंडिंग मिलती, न ही एंकर को मैगसेसे पुरस्कार मिलता और न ही उसकी फोटो खीचने वाले को पुलितजर अवार्ड इसीलिए इस ख़बर को दबा दिया गया और नहीं दिखाया गया । अब हालत ये हुआ कि रोहित कि बहन को खुद से ही विडियो रेकॉर्ड करके सोसल मीडिया की सहायता लेनी पड़ी ताकि उस की बात लोगों तक पहुँच सके । रोहित की बहन ने रोते हुए उस विडियो के जरिये जो बात बोली है मैं उस बात को मैं अपने लोगों के सामने लिखने जा रहा हूँ । ——-

 “मेरे भैया को 6 लोगों ने मारकर नदी में फेंक दिया और पुलिस बोल रही है कि वह पानी में डूबकर मर गया है क्योंकि पुलिस ने पैसे खा लिया है । मेरे पापा बोल रहे थे कि अगर उन्हे इंसाफ नहीं मिला तो वे थाने में जाकर के अपने आप को गोली मार लेंगे , अब मैं और मेरा छोटा भाई किसके सहारे जिएंगे बताइये और पुलिस ने जिन लोगों को जेल में डाला था उनको छोड़ दिया है प्लीज आप लोग हमारी मदद कीजिये। ‘’

ऑप इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक रोहित के पिता बताते हैं कि 28 मार्च को गाँव के कुछ बच्चे रोहित को क्रिकेट खेलने के लिए बुलाते हैं। रोहित साथ चला जाता है तो वे लड़के रोहित को गाँव में  बनी नई मस्जिद में ले जाते हैं जहां उनके माता पिता उनका इंतज़ार कर रहे होते हैं । मान्यता है कि मजहबी प्रार्थना स्थल को शक्तिशाली बनाना है तो किसी काफ़िर कि कुर्बानी देनी पड़ती है इसलिए उस 15 साल के बच्चे रोहित को कुर्बान कर दिया गया।उसके बाद उसे एक भारी पत्थर से बांधकर नदी में फेंक दिया गया। पीड़ित परिवार ने थाने में शिकायत की तो वहाँ उनको मार कर भगा दिया गया। उस समय एफआईआर भी नहीं की गई , बाद में एफआईआर हुई भी तो वह भी पॉस्को एक्ट के तहत नहीं की गई जो कि 15 साल के बच्चे के केस में होना चाहिए।

पिता पर दबाव बनाया जाता है कि वह ये बात स्वीकार कर लें कि यह एक एक्सिडेंट हैं, बच्चे के मृत शरीर का पोस्टमार्टम किया भी गया तो उसको पोस्टमार्टम रूम में ले जाकर 2-3 मीनट में वापस बाहर ला दिया गया । रोहित के पिता राजेश पर यह भी दबाव बनाया गया कि 8 लाख रुपये लेकर मामले को रफा दफा कर लें लेकिन जब उन्होने पैसे लेने से माना किया तो उनके साथ थाने मे ही मार पीट कि गयी। साबित अंसारी और रजा अंसारी नाम के दो लोगों द्वारा राजेश जयसवाल को केस वापस लेने की धमकी आनी शुरू हो गई , जब राजेश इस बात की शिकायत लेकर पुलिस इंस्पेक्टर अश्विनी तिवारी के पास गए तो उन्होने राजेश को गाँव छोड़कर चले जाने की सलाह दी और अपने परिवार की सुरक्षा करने के लिए राजेश ने यही किया और वे गोपालगंज छोड़कर सीधा उत्तर प्रदेश आ गए जहां वे अज्ञात स्थान पर रह रहे हैं। अब उन्हे इस बात का डर है कि मीडिया में ये बात आ जाने से आरोपी उन से बदला लेंगे  इस लिए अपने गाँव भी वापस नहीं जा सकेंगे , और अब अपने ही देश में विस्थापित होकर रह गए हैं जो हिंदुओं के लिए कोई नई बात नहीं है।  आरोपियों को भी इतने कम दिन में छोड़ दिया गया है और शायद यही कारण था पॉस्को एक्ट कि धाराएँ नहीं लगाई गईं थी क्योंकि पॉस्को लगाने के बाद जांच पूरी होने तक आरोपियों को जेल में ही रहना पड़ता है। राजेश का कहना है कि उनको मुआवजा , पैसा कुछ नहीं चाहिए उन्हे चाहिए तो केवल इंसाफ। लेकिन अब सवाल ये आता है कि उन्हे न्याय दिलाएगा कौन क्योंकि जो सामने हैं वे तो एक खरोच आने पर भी वॉशिंगटन पोस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स में बड़े – बड़े लेख लिखवाने का सामर्थ्य रखते हैं। लेकिन राजेश के पास तो इतने भी संसाधन नहीं कि न्यूज़ चैनल पर भी खबर चलवा सकें या मुख्यमंत्री तक भी इस खबर को पहुंचा सके।

बस कुछ छोटे मोटे लोग हैं जो इस खबर को फैला रहे हैं ऐसे लोगों को न ही विदेशों से फंडिंग मिलती है और न ही किसी पॉलिटिकल पार्टी का सपोर्ट मिलता है लेकिन फिर भी जीतने लोगों तक पहुंचा सके पहुंचा रहे हैं क्योंकि लोकतन्त्र में संख्या में ही शक्ति है । बस वही किया जा सकता है प्रश्न पूछा जा सकता है , जवाब मांगा जा सकता है चीखा चिल्लाया जा सकता है तो बस वही कीजिये । सत्ता में रहने वालों से प्रश्न पूछिए , जो सत्ता में नहीं हैं उनको एहसास कराइए और जनता को जागरूक कराइए ताकि आगे से किसी और रोहित को किसी और गाँव में किसी और मस्जिद पर कुर्बान होने से बचाया जा सके ।

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Updatewala Team

The Founder Of Updatewala a leading author and specializing in political, religious, and many more things

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