सनातन धर्म

रावण की बहन सूर्पनखा की जीवन के बारे में 10 महत्वपूर्ण बातें

रामायण की सूर्पणखा का नाम तो आपने सुना ही होगा , अरे वही सूर्पणखा जिसने राम और लक्ष्मण दोनों भाइयों में से किसी भी एक भाई से विवाह करना चाहती थी और जब दोनों भाइयों ने उसके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया तब वह माता सीता को मारने के लिए दौड़ी थी जिसके कारण लक्ष्मण ने भगवान राम की आज्ञा से उसके नाक काट लिए थे । वही त्रिलोक विजेता राजा रावण की बहन सूर्पणखा जिसने खुद की गलती होते हुए भी अपने भाई रावण से झूठ बोलकर माता सीता का हरण करवाया । उस सूर्पणखा का विवरण बाल्मिकी रामायण, रामचरितमानस , साकेत , राम चंद्रिका आदि ग्रन्थों में मिलता है ।

लेकिन क्या आपको पता है कि सूर्पणखा के ही श्राप से रावण के पूरे कुल का सर्वनाश हुआ था , आज हम आपको सूर्पणखा के बारे में ऐसी ही 10 रोचक जानकारियाँ बताने जा रहे हैं जिनके बारे में शायद  आपको पता ही न हो। —-

  • सूर्पणखा ऋषि विश्वश्रवा और कैकसी की पुत्री तथा लंका नरेश रावण की बहन थी । ‘‘शूर्पवत नखानि यस्या सा शूर्पणखा” अर्थात जिसके नख ( नाखून ) सूप के समान हो वह शूर्पणखा , उसके नाखून सूप के ही समान थे जिसके कारण उसका नाम सूर्पणखा पड़ा ।
  • बहुत कम लोगों को ये बात पता होगी कि शूर्पणखा की शादी भी हुई थी , क्योंकि सबको तो रामायण देखकर यही लगता होगा कि उसकी शादी नहीं हुई थी । सूर्पणखा के पति का नाम था विद्युतजिव्ह , वह कालकेय नाम के राजा का सेनापति था ।
  • एक बार की बात है जब रावण त्रिलोक विजय पर निकला था तो एक युद्ध में रावण ने सूर्पणखा के पति विद्युतजिव्ह की हत्या कर दी थी जिससे सूर्पणखा बहुत दु:खी हुई थी और उसने मन ही मन रावण को श्राप दे दिया था कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा । विद्युतजिव्ह कि मृत्यु के बाद रावण ने सूर्पणखा से बहुत ही अनुनय विनय करके उसे अपने भाई खर और दूषण के पास भेज दिया था जिसके बाद वह दंडकारण्य  वन में रहने लगी थी । इसके अलावा यह भी एक कथा है कि एक बार रावण सूर्पणखा के ससुराल गया हुआ था और उसने विद्युतजिव्ह को भगवान विष्णु कि उपासना करते हुए देख लिया था क्योंकि विद्युतजिव्ह भगवान विष्णु का भक्त था जिसकी वजह से रावण ने क्रोधित होकर उसकी हत्या कर दी थी।
  • कथा के अनुसार भगवान राम भी दंडकारण्य वन में ही रहा करते थे , एक दिन सूर्पणखा वन में घूमते हुए इनकी कुटिया के पास पहुँच गई और भगवान राम को देखते ही मोहित हो गयी। उसके बाद उसने भगवान राम से विवाह करने का प्रस्ताव रख दिया और कहा कि मैं इस वन कि राक्षसी हूँ और त्रिलोक विजेता लंकापति रावण मेरा बड़ा भाई है, इस पर भगवान राम ने मुस्कुराते हुए सूर्पणखा से कहा कि मैं शादी – शुदा हूँ तुम लक्ष्मण के पास जाओ ।
  • भगवान राम के कहने पर सूर्पणखा ने लक्ष्मण के समक्ष भी विवाह का प्रस्ताव रखा , लेकिन लक्ष्मण ने भी विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए राम के पास भेज दिया । जिसके बाद से सूर्पणखा भड़क उठी और उसने कहा कि मैं अभी इस सीता को खा लेती हूँ तब यह सौतन नहीं रहेगी जिसके बाद हम लोग शादी कर लेंगे और वह तेजी से माता सीता की तरफ झपटी जिसके बाद राम कि आज्ञा से लक्ष्मण ने उसके नाक  काट लिए । जब लक्ष्मण ने सूर्पणखा कि नाक काटी उस समय राम, लक्ष्मण , सीता और सूर्पणखा पंचवटी में थे और पंचवटी नासिक में पड़ता है , इसलिए कहा जाता है कि सूर्पणखा के नाक( नासिका ) काटने से उस जगह का नाम नासिक पड़ गया । हालांकि कुछ विद्वान इस बात को नहीं मानते हैं ।
  • अपनी कटी हुई नाक को लेकर सूर्पणखा सबसे पहले अपने भाई खर- दूषण के पास गई और घटना की आप बीती सुनाया , जिसके बाद खर – दूषण ने अपनी सेना सहित राम पर आक्रमण कर दिया जिसके बाद भगवान राम ने लक्ष्मण और सीता को एक कन्दरा के भीतर जाने को कहा और उसके बाद से भगवान राम ने खर ,  दूषण , त्रिसरा साहित उनके 14000 राक्षसों का भी वध कर दिया।
  • पंचवटी में लक्ष्मण से अपमानित होकर सूर्पणखा अपने बड़े भाई रावण के पास गई और अपनी सारी व्यथा उसको बताई , और उसकी कान भरते हुए कहा कि सीता बहुत ही सुंदर स्त्री है तीनों लोकों में उसके जैसी सुंदर स्त्री कोई नहीं है वह तुम्हारी पटरानी बनाने के लिए योग्य है । इस तरह से रावण ने सूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए अपने मामा मारीच के साथ सीता हरण कि योजना बनाई ।
  • कथाओं में कहा जाता है कि सूर्पणखा पूर्व जन्म में नयनतारा नाम कि अप्सरा थी , उस समय मृत्युलोक पर ‘एक वज्र’ नामक ऋषि बहुत ही घोर तपस्या कर रहे थे । उनकी तपस्या को भंग करने के लिए इंद्र ने नयनतारा को पृथ्वी पर भेजा और जब नयनतारा ने उनकी तपस्या को भंग कर दिया तब ऋषि ने उसको श्राप दे दिया और कहा कि जाओ तुम अगले जन्म में राक्षसी बनोगी लेकिन जब नयनतारा ने बहुत ही विनती किया तब ऋषि ने कहा कि जाओ तुमको उसी जन्म में तुमको प्रभु के दर्शन होंगे उसके बाद से नयनतारा ने अप्सरा का शरीर त्याग कर अगले जन्म में राक्षसी बनी ।
  • जब लक्ष्मण जी ने सूर्पणखा के नाक काट दिया तब सूर्पणखा को यह ज्ञान हो गया कि ये कोई साधारण मानव नहीं हैं वे स्वयं भगवान हैं इसलिए उसने प्रभु कार्य करने के लिए उनकी सहायिका बनकर खर – दूषण , रावण , कूम्भकर्ण , मेघनाथ आदि रक्षसों का वध करवाया और रावण के वध होने के बाद प्रभु प्राप्ति के लिए पुष्कर जी चली गई , और वहाँ जल में खड़ी होकर भगवान शिव का ध्यान करने लगी । हालांकि यह भी कहा जाता है कि रावण कि मृत्यु के बाद सूर्पणखा दैत्य गुरु शुक्राचार्य के आश्रम में चली गई और वहीं रहने लगी ।
  • ऐसी मान्यता है कि शिव आराधना के बाद भगवान शिव ने प्रसन्न होकर सूर्पणखा को दर्शन देकर वर प्रदान किया कि 28 वें द्वापर युग में जब श्रीराम कृष्ण अवतार में जन्म लेंगे तब तुम्हें कुब्जा के रूप में तुम्हें भगवान कृष्ण से पति का सुख प्राप्त होगा और भगवान तब उस अवतार में तुम्हारा कूबड़ ठीक करके तुम्हें वही नयनतारा का मनमोहक रूप प्रदान करेंगे , और ये कहानी महाभारत में दिखाया भी गया है जब भगवान कृष्ण नन्द ग्राम से मथुरा आए थे तो सबसे पहले उन्होने एक लड़की का कूबड़ ठीक किया था और वही पूर्व जन्म की सूर्पणखा थी ।
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Updatewala Team

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