बुलंदियों को हासिल करने वाली एयर इंडिया घाटे में कैसे चली गई |Why did Air India go to deficit.

एयर इंडिया  (Air India)

 

एक वक़्त था जब ‘Air India’ का नाम Aviation Sector में भारत की शान का कारण था , एक वक़्त था जब लोग भारत की बड़ी – बड़ी Airlines Companies को छोड़ कर Air India के धीमे सफ़र को चुनते थे , एक वक़्त था जब जब ”Singapore Airlines”जैसी बड़ी companies के लिए Air India एक Role Model थी |
लेकिन आज ये कंपनी हजारों करोड़ के घाटे के नीचे दबी हुई है , और घाटा भी इतना ज्यादा कि वह सरकार के गले की फांस बनती जा रही है , जिसके चलते सरकार आज “Air India” को बेचने की कोशिशों में लगी हुई है |
लेकिन ये हालात आखिर कैसे पैदा हुए ? आखिर कैसे 1950 से लेकर 1980 तक देश की सबसे पसंदीदा Airlines आज डूबने के कगार पर पहुंच चुकी है ?
कैसे देश के एक महान बिजनेसमैन ने अपनी एक छोटी सी एयर लाइन कंपनी को देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी बनाया ?
तो चलिए आज हम आपको बताते हैं एयर इंडिया के 86 साल पुराने उस सफर के बारे में जब एक चिट्ठियां बांटने वाले Plane से शुरू हुई कंपनी देश की सबसे बड़ी Airline Company बन के उभरी , जो कई बुलंदियों को छूने के बाद आज डूबने के कगार पर है |

एयर इंडिया का सफर (Journey Of Air India)

एक कहावत है कि हर बड़े काम की शुरुआत एक छोटे लेवल से ही होती है , ठीक ऐसा ही कुछ Air India के साथ भी हुआ |
Tata Family  के 28 साल के वारिस “JRD TATA” ने 1932 में अपनी एक Airline Company  की शुरुआत की जिसका नाम रखा   गया   Tata Airmail.
इस कंपनी में शामिल थे दो विमान , 15, October 1932 को इस कंपनी के पहले विमान ने करांची से बॉम्बे तक की उड़ान भरी जिसे खुद  “JRD Tata” चला रहे थे |
अगर आप लोग नहीं जानते हो तो हम आपको बता दें कि “JRD Tata” ब्रिटेन द्वारा स्थापित “Royal Aeroclub Of India And Burma” से प्रशिक्षित भारत के पहले “Civil Aviation Pilot” थे | इस कंपनी में दूसरे पायलट थे  “Nevil Vincent” , इस कंपनी में 2 Pilot, 3 Engineer  , 4 Coolie और 2 Watchman  का स्टाफ शामिल था | इस कंपनी ने अपनी स्थापना के पहले साल ही 10 टन चिट्ठियां और 155 Passenger ढोकर लगभग 60000 का मुनाफा कमाया था |
1938 आते आते “Tata Air Mail“का नाम बदलकर “Tata Airlines” कर दिया गया | और यह कंपनी दिल्ली , हैदराबाद, गोवा और कोलम्बों तक उड़ान भरने लगी | द्धितीय विश्वयुद्ध के बाद “JRD Tata “को Airlines Industry में और भी संभावनाएं दिखने लगीं , फिर क्या था साल 1946 में उन्होंने “Tata Airlines” को Public कर दिया और उसका नाम बदलकर रखा गया Air India | इसके साथ ही इस कंपनी के जहाजों के बेड़े में उस वक़्त का सबसे लेटेस्ट विमान “Lockheed Constellatin” शामिल किया गया जिसका नाम रखा गया “Malabar Princess” | साल 1947 में आजादी से पहले “Air India” को लेकर देश में कुल 9 Airlines Companies  काम करती थीं जो आजादी के बाद इनकी संख्या 8 रह गई –
1- Indian National Airways
2 – Air Services Of India
3- Deccan Airways
4 – Ambica Airways
5 – Bharat Airways & Mistry Airways
6 – Tata Airlines
7 – Air India

क्योंकि Orient Airways  पकिस्तान में Shift हो गयी थी.
लेकिन Air India ने भारत सरकार के साथ International Flight शुरू करने का करार कर लिया | जिसके बाद 8 जून 1948 को Air India  के “Lockheed Malabar Princess“ने पहली बार बॉम्बे से लंदन के लिए उड़ान भरी जिसका उस वक़्त किराया था 1720 रुपये | इसके पांच साल बाद ही सरकार ने 1953 में “Air Corporation Act 1953” पास कर दिया जिसके साथ” Airlines Industry” को Nationalised कर दिया गया , जिसके बाद देश में चल रही 8 Domestic Companies  को Merge कर “Domestic Airline Corporation” के लिए ” Indian Airlines” की स्थापना की गयी और “Interrnational Air Services”  को Air India के ही अंतर्गत रखा गया |
उस वक़्त सरकार ने “JRD Tata”को Air India  का “Chairman” बनने का न्योता भी दिया जिसे JRD Tata  ने स्वीकार कर लिया |
असल में Air India JRD Tata के दिल के काफी करीब थी शायद यही कारण था कि JRD Tata ने इस Airline  को बुलंदियों तक पहुंचाने में दिन रात एक कर दिया |
2004 में “Rupa Publications” द्वारा छापी गई JRD Tata  के Letters पढ़ने के बाद पता चला कि वो किस तरह Airlines के उड़ान के दौरान भी उसके काम पर पुरी निगरानी रखते थे |
टाटा के Letters  और Key-notes पढ़ने के बाद पता चलता है की वो किस तरह से Air India के छोटी से छोटी कमी को भी दूर करने के लिए तत्पर रहते थे |फिर चाहे वो प्लेन में Serve हो रही Coffee  हो या फिर Plane में लगी पर्दों की लम्बाई JRD Tata किसी भी तरह से Air India  के Services  में Compromise नहीं करना चाहते थे |
टाटा के 25 साल के अथक मेहनत के चलते एयर इंडिया की पूँजी 100 मिलियन डॉलर से  5 बिलियन डॉलर तक बढ़ गए थे | उस ज़माने में Air India का Status इतना बढ़ गया था कि 70 के दशक में “Singapore Airline” ने पुरी दुनिया के Airlines को दरकिनार कर Air India  को अपना Role Model बनाया |
फिर 1978 में मोरारजी देसाई ने JRD Tata को Air India  के Chairman पद से हटा दिया , बताया जाता है कि मोरारजी देसाई Air India  में शराब परोसे जाने के खिलाफ थे जबकि JRD Tata  का मानना था कि International Flights  को चलाने का यह सही तरीका नहीं है | JRD Tata  के वक़्त Air India  को “Quality Of Services” और Discipline  के मामले में अव्वल दर्जे में माना जाता था लेकिन JRD टाटा के बाद Air India  का ये Status गिरना शुरू हो गया |
ये अलग बात है कि 1980 में इंदिरा गाँधी के सत्ता में आने के बाद JRD Tata  को Air India के “Board Of Director” में दुबारा शामिल किया गया , लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और “Air India” का बुरा वक़्त शुरू हो चूका था |
फिर 1994 में “Air Corporation Act 1953”  की जगह “Air Corporation Act 1994 लागु किया गया , और “Private Airlines” के लिए “Aviation Sector” को खोल दिया गया , जिसके बाद “Air India”के Competition  में कई Domestic companies जैसे Jet Air , और  “Sahara Airlines” मैदान में उतर गईं | इस नयी Policy के बाद बढ़ते Competition  और कम होती सेवाओं के कारण Indian Airlines और Air India घाटे में चली गयी जिसके बाद साल 2007 में मनमोहन सरकार ने Indian Airlines  और Air India  को Merge कर दिया और जिसका नाम रखा गया “National Aviation Company Of India Limited(NACIL ) .

उस साल दोनों एयरलाइन्स का घाटा 541 करोड़ और 240 करोड़ था | 2007 में दोनों Companies  के पास 3000 कर्मचारी थे जिनकी संख्या प्रति प्लेन 256 कर्मचारी थी।, लेकिन Global Standard  के मुताबिक प्रति प्लेन 100 कर्मचारी होने चाहिए , लेकिन इस फैसले के बाद Air India  9 साल तक घाटे में ही चलती रही | और सरकार अब तक करोडो रुपये का “Bail Out Package” कंपनी को दे चुकी है | लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली की मानें तो सरकार Air India  को  और ज्यादा कर्ज देने के पक्ष में नहीं है , सरकार अब Air India  और उसके 5 subsidiaries को बेचने के मूड में है , सरकार Air India  का 76 % बेचना चाहती है और और अपने पास 24 % रखना चाहती है |

लेकिन सरकार के कुछ शर्तों के कारण कोई भी कंपनी अब तक Air India को खरीदने के लिए आगे नहीं आई है , असल में इसके कई कारण हैं –
1 सरकार अब भी इसके 24 प्रतिशत शेयर अपने हाथ में रखना चाहती है |
2 – हजारों करोड़ रुपये का घाटा |
3 – Employees  से जुडी Policies
4- Air India के Market Share में कमीं .
अभी हाल ही में Pilot Association ने भी एयर इंडिया को खत लिखकर यह चेताया है कि Spare Parts  की कमीं के कारण Air India Aircraft में 23 प्रतिशत Aircraft  उड़ान तक नहीं भर पा रहे हैं , इस खत में यह भी लिखा कि Spare Parts  के अलावा Planning Co-Ordination और Finance  के चलते भी कई Aircrafts पर असर पड़ रहा है जिसके कारण Air India  को और भी नुकसान झेलना पड़ रहा है | यही कारण है जिनकी वजह से कभी बुलंदियों को छूने वाली Air India  आज पाई पाई के लिए मोहताज है , ऊपर से Crude Oil  की बढ़ती कीमतें भी चिंता का विषय बनी हुई हैं |
अब देखना ये है कि 86 साल पुराना ये सफ़र किस ओर करवट लेता है , कहीं ये भारत के आख़िरी महाराजा का अंत तो नहीं है

दोस्तों ये जानकारी आप लोगों को कैसी लगी हमें कमेंट कर के जरूर बताएं। …

 

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