सिंह बनो सिंहासन की चिंता मत करो आप जहाँ बैठोगे वहीँ सिंहासन हो जाएगा

 ”किसी ने बहुत ही अच्छी बात कही है कि सिंह अगर चट्टान पर भी बैठ जाए तो उसे चट्टान नहीं सिंहासन कहते हैं। इसलिए कहा गया है की जिंदगी में सिंहासन का मोल न रखे सिंह बने ताकि आप जहाँ कहीं भी बैठें वह सिंहासन बन जाए।”
दोस्तों आज मैं आपके सामने एक छोटी सी कहाँ लेकर आया हूँ , एक बार एक गांव में बहुत ही कमाल का मूर्तिकार रहा करता था।

उसकी मूर्तियों के बारे में लोग कहते थे कि अगर कोई व्यक्ति उस मूर्तिकार द्वारा बनाई गयी मूर्तियों को देख ले तो उस व्यक्ति को ये

पहचानना मुश्किल हो जाता था कि उसके सामने कोई इंसान खड़ा है या कोई मूर्ति ? मतलब वो मूर्तियां हूबहू एक दम इंसान के जैसे

लगती थीं , एक तरह से हम उन्हें बोलती हुई मूर्तियां कह सकते हैं। लेकिन उस मूर्तिकार का भी एक दिन दुनिया छोड़कर जाने का

समय आ गया था क्योंकि उसकी भी उम्र हो चली थी और अब वह बूढ़ा हो चूका था। लेकिन उस मूर्तिकार को ये लगता था कि उसे

अभी नहीं मरना चाहिए उसे और भी जीना चाहिए इसलिए उसने अपने ही शक्ल की 10 मूर्तियां और बनाई ताकि यमदूतों को ये

न पता चले कि इन मूर्तियों में असली मूर्तिकार कौन है ? उन 10 मूर्तियों को बनाने के बाद उन मूर्तियों में से एक मूर्ति में मूर्तिकार

छुपकर बैठ गया। जब यमदूत नीचे आये उस मूर्तिकार के प्राण लेने तो यह देख कर यमदूत आचम्भित रह गए क्योंकि उनके सामने उस

मूर्तिकार के शक्ल की 11 मूर्तियां थी। अब यमदूतों को बड़ी दुबिधा हुई कि आखिर वो लोग ऊपर लेकर जाए तो किसे ले जाए ?

यमदूत खाली हाथ भी वापस भी नहीं जा सकते क्योंकि जो सृष्टि का नियम है उसका उलंघन होगा, और अगर मूर्ति को तोड़ते हैं तो उस

कलाकार की कला का अपमान होगा जिसने ये मूर्ति बनाई है। यमदूतों को लगा कि कुछ तो करना पड़ेगा क्योंकि हम बिना उस

मूर्तिकार के प्राण लिए खाली हाथ नहीं लौट सकते। उन यमदूतों में एक बहुत ही होशियार यमदूत था उसे लगा कि किसी भी इंसान को जो

सबसे अहम् बुराई होता है वह होता है उसका अहंकार, आज उसी की परीक्षा लेते हैं। तो तपाक से उस यमदूत ने उन मूर्तियों के सामने

बोला कि- ” जिसने भी ये मूर्तियां बनाई है गज़ब की बनाई है लेकिन एक कमी रह गयी है वो अगर ठीक हो जाती तो कमाल हो जाती।”

ये बात जब उस मूर्तिकार ने सुनी तो उसने तुरंत उन मूर्तियों से बाहर आकर बोल पड़ा कि क्या कमी रह गई है ? उस मूर्तिकार ने जैसे

ही ये बात बोला उस यमदूत ने तुरंत बोला कि- ”महराज बस यहीं चूक गए है आप कि मूर्तियां कभी बोला नहीं करते।” हम बस यही

परीक्षा ले रहे थे कि आपका अहंकार कहाँ चोट खायेगा ?

दोस्तों ये छोटी सी कहानी हमें बताती है कि घमंड इंसान को कितना नीचे लेकर आएगा , इसीलिए हमेशा धरातल से जुड़े रहें क्योंकि घमंड         उसे छूता है जो ऊपर उड़ता है।
क्योंकि कहा जाता है कि अगर अच्छा वक़्त चल रहा है तो सरल बन कर रहें और अगर बुरा वक़्त चल रहा है तो इंतज़ार करें अच्छा वक़्त ज़रूर आएगा।

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