परमवीर चक्र क्या है , और ये किसे दिया जाता है

परमवीर चक्र भारत का सबसे बड़ा शौर्य सैन्य सम्मान है | इसे भारत के  सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न के बाद सेना को दिया जाने  वाला सबसे सम्मानित पुरस्कार माना जाता है | इस पुरस्कार की शुरुआत 26 जनवरी 1950 को की गई थी | इससे पहले जब भारतीय सेना ब्रिटिश  सेना के तहत काम करती थी तो उस समय विक्टोरिया पुरस्कार सेना के लिए सर्वोच्च पुरस्कार माना जाता था |

 

किसे दिया जाता है परमवीर चक्र

परमवीर चक्र सेना के उन महारथियों ( शूरवीरों ) को दिया आता है जो  दुश्मनों की मौजूदगी में भी दुश्मनों के सामने अपना सीना ताने खड़े रहते हैं और अपने पराक्रम को प्रदर्शित करते हैं | यह पुरस्कार सेना के किसी भी अंग के कर्मचारी या अधिकारी  को दिया जा सकता है चाहे वह सेना का हो , नौसेना का , वायुसेना का हो या फिर किसी अर्धसैनिक बल का ही कर्मचारी या अधिकारी  क्यों न हो सबको दिया जाता है | अधिकतर यह पुरस्कार किसी भी सैन्य अधिकारी के मरणोपरांत ही दिया जाता है | लेफ्टिनेंट या उससे छोटे पदों पर कार्यरत अधिकारियों या कर्मचारियों को यह सम्मान मिलने पर उन्हे या उनके परिवार को नक़द राशि या पेंशन देने का प्रावधान है | इस पुरस्कार को सबसे पहली बार 3 नवम्बर 1947 को और आखिरी बार 6 जुलाई 1999 को दिया गया था |

दोस्तों आज मैं आप लोगों को बताने आ रहा हूँ कि अब तक कितने लोगों को ये पुरस्ककर मिल चुका है और कब-कब मिला है

1  मेजर सोमनाथ शर्मा – मेजर सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना के कुमाऊँ रेजीमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी-कमांडर थे | जिन्होने अक्टूबर – नवंबर 1947 के भारत – पाक संघर्ष मे हिस्सा लिया था | भारत सरकार ने मेजर सोमनाथ शर्मा को मरणोपरांत 3 जुलाई 1947 को  परमवीर चक्र से सम्मानित किया  था | परमवीर चक्र पाने वाले वे प्रथम व्यक्ति हैं |

2 लांस नायक करम सिंह –  लांस नायक करम सिंह परमवीर चक्र प्राप्त  करने वाले प्रथम जीवित भारतीय सैनिक थे | करम सिंह 1941 मे सेना में शामिल हुए थे और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्मा की ओर से भाग लिए थे | इस विश्व युद्ध मे उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हे ब्रिटिश भारत मिलिट्री मैडल दिया गया था | उन्होने 1947 मे हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध मे भी भाग लिया था जिसमे टिथवाल के दक्षिण में स्थित रीछमार गली में एक अग्रेषित पोस्ट को बचाने में उनकी सराहनीय  भूमिका के लिए 13 अक्टूबर 1948 को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था |

3 सेकेंड लेफ्टिनेंट राम रघोबा राणे – राम रघोबा राणे 1918 मे पैदा हुए थे | द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वे ब्रिटिश भारतीय सेना मे कार्यरत थे  | युद्ध के बाद की अवधि मे वे सेना मे कार्यरत रहे और 15 दिसम्बर 1947 को भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के बॉम्बे सैपर्स रेजीमेंट  मे नियुक्त किए गए |1947-48  के भारत पाक युद्ध मे राणे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई  थी | उनकी वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने 8 अप्रैल 1948 को उन्हे परमवीर चक्र से सम्मानित किया था | 1968 मे राम रघोबा राणे भारतीय सेना से प्रमुख बनकर सेवानिवृत हुए | 1994 मे 76 वर्ष की उम्र मे उनका निधन हो गया |

4 नायक यदुनाथ सिंह – नायक यदुनाथ सिंह परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक थे | उन्होने 1947 के भारत पाक- युद्ध मे अपना अद्वितीय योगदान दिया था और वीरगति को प्राप्त  हुए थे जिसके लिए उनको मरणोपरांत  फरवरी 1948  में परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था  | यदुनाथ सिंह सबसे पहले 1941 मे ब्रिटिश सेना मे भर्ती हुए थे | द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होने बर्मा मे जापान के   खिलाफ लड़ाई मे भाग लिया था |

5 कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह – मेजर पीरू सिंह का जन्म 20 मई 1918 को राजस्थान के बेरी गाँव मे हुआ था |वह लाल सिंह के पुत्र थे और उनके परिवार मे 7 बच्चे जिनमे 3 भाई और चार बहनें थी | पीरू सिंह उन सातों मे सबसे छोटे थे | मेजर पीरू सिंह बचपन से ही हमेशा स्कूल से नफ़रत करते थे क्योंकि उनको हमेशा से ही प्रतिबंधित वातावरण पसंद नहीं था | पीरू सिंह बचपन से ही सेना मे भर्ती होना चाहते थे  | उनको 20 मई 1936 को झेलम मे पंजाब रेजीमेंट की 10 वीं बटालियन में नामांकित किया गया था | द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत के बाद उन्हे ब्रिटिश कॉमन वेल्थ ओक्यूपेशन फोर्स के हिस्से के रूप में जापान भेजा  गया जहां उन्होने सितम्बर 1947 तक सेवा की | उसके बाद उन्हे राजपूताना राइफल्स की छठी बटालियन में स्थानांतरित कर दिया गया | 18 जुलाई 1948 को उनके महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकार द्वारा परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |

6 कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया- कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया एक भारतीय सैन्य अधिकारी और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान के सदस्य थे | वह परमवीर चक्र प्राप्त  करने वाले एकमात्र संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक हैं | वह किंग जॉर्ज के रॉयल मिलिट्री कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र थे | उन्हे यह सम्मान सन 1962 में मरणोपरांत मिला था |

7 मेजर धनसिंह थापा – मेजर धनसिंह थापा परमवीर चक्र से सम्मानित नेपाली मूल के भारतीय सैनिक थे |उन्हे यह सम्मान 1962 मे मिला था  |वे 1949 मे भारतीय सेना की आठवीं गोरखा राइफ़ल्स में अधिकारी के रूप में शामिल हुए थे | उनका जन्म 10 अप्रैल 1928 को हिमांचल प्रदेश के शिमला में हुआ था

8 सूबेदार जोगिंदर सिंह – सूबेदार  जोगिंदर सिंह सिख  रेजीमेंट के एक भारतीय सैनिक थे | उनका जन्म 26 सितंबर 1921 को पंजाब के मोगा जिले के गाँव मेहाकलन, ब्रिटिश भारत में हुआ था | जोगिंदर सिंह को 1962 के भारत-चीन युद्ध मे असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था |

9 मेजर शैतान सिंह – मेजर शैतान सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1924 को राजस्थान राज्य के जोधपुर जिले के बंसार गाँव में हुआ था | उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह थे , जिन्होने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान फ्रांस में भारतीय सेना के साथ सेवा की और ब्रिटिश सरकार द्वारा ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर से सम्मानित किए गए थे | शैतान सिंह को 1963 मे मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था |उन्होने अपने वतन के लिए काफी संघर्ष किया लेकिन अंत मे 18 नवंबर 1962 को भारत- चीन युद्ध मे शहीद हो गए |

10 कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद – वीर अब्दुल हमीद का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धामपुर गाँव मे 1 जुलाई 1933 मे एक साधारण दर्जी परिवार में हुआ था | उनकी ,माता का नाम सकीना बेगम और पिता का नाम मोहम्मद उस्मान था | अब्दुल हमीद भारतीय सेना के 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे जिन्होने 1965 के भारत – पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ मे लड़े गए युद्ध मे अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए वीरगति को प्राप्त कर गए थे , जिसके लिए उनको 16 सितंबर 1965 को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था |

11 लेफ्टिनेंट कर्नल आर्देशिर तरापोर – आर्देशिर तरापोर भारतीय सेना के एक अधिकारी थे | इन्होने भारत – पाकिस्तान युद्ध 1965 मे अद्वितीय साहस व वीरता का परिचय , तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था|  फिल्लौर की लड़ाई मे अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन करने के लिए इन्हे वर्ष 1965 मे मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था |

12 लांस नायक एल्बर्ट एक्का – अल्बर्ट एक्का का जन्म 27 दिसंबर 1942 को झारखंड के गुमला जिला के डुमरी ब्लॉक के जरी गाँव में हुआ था | उनके पिता का नाम जूलियस एक्का , माँ का नाम मरियम एक्का और पत्नी का नाम बलमदिन एक्का था | जन्मस्थल गाँव जरी  चैनपुर तहसील में पड़ने वाला एक आदिवासी क्षेत्र है जो झारखंड राज्य का हिस्सा है | 1971 के भारत पाक युद्ध में हिली की लड़ाई में  अल्बर्ट एक्का शहीद हो गए थे जिसके लिए उनकी वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने  उन्हे मरणोपरांत  परमवीर चक्र से सम्मानित किया था |

13 फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों – निर्मल जीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई 1943 को पंजाब प्रांत के लुधियाना शहर मे जाट सिख परिवार मे हुआ था | उनके पिता का नाम फ्लाइट लेफ्टिनेंट तारलोक सिंह सेखों था | उन्हे 4 जून 1867 को पायलट अधिकारी के रूप में भारतीय वायुसेना के रूप में सम्मिलित किया गया था | 1971 के भारत पाकिस्तान के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के हवाई हमले के खिलाफ श्रीनगर एयर बेस  के बचाव मे निर्मल जीत सिंह शहीद हो गए थे , जिसके लिए उनको मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च शौर्य सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था |

14 लेफ्टिनेंट अरुण क्षेत्रपाल – सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण क्षेत्रपाल भारतीय सेना के एक अधिकारी थे जिन्हे दुश्मन के सामने बहदुरी के लिए 26 जनवरी 1972 को परमवीर चक्र से नवाजा गया था | यह पुरस्कार उनको मरणोपरांत  दिया गया था | अरुण क्षेत्रपाल 1971 के भारत पाक युद्ध मे पराक्रम दिखाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे | उनका जन्म उनका जन्म 14 अक्टूबर 1950 को पुणे महराष्ट्र में  हुआ था | उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल एम एल क्षेत्रपाल भारतीय सेना में कोर ऑफ इंजीनियर्स अधिकारी थे |

15 मेजर होशियार सिंह – मेजर होशियार सिंह दहिया का जन्म 5 मई 1937 को हरियाणा के सोनीपत जिले के सीसना गाँव मे एक हिन्दू जाट परिवार में हुआ था | उन्होने भारतीय सेना मे बहुत ही बहादुरी के साथ की और ब्रिगेडियर के रूप में सेवा निवृत्त हुए |1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान कुशल नेतृत्व के लिए उन्हे 26 जनवरी 1972 को परमवीर चक्र से  सम्मानित किया गया जो 17 दिसंबर 1971 से प्रभावी था | यह पुरस्कार उनको मरणोपरांत प्रदान किया गया था |

16 सूबेदार बन्ना सिंह – मानद कैप्टन बनना सिंह परमवीर चक्र से सम्मानित भूत पूर्व भारतीय सैनिक हैं इनको यह सम्मान 1987 में जब इन्होने  सियाचिन ग्लेशियर को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराने वाले अभियान मे अपने शौर्य का प्रदर्शन किया था इनका  जन्म 6 जनवरी 1949 को जम्मू और कश्मीर के कदयाल गाँव मे हुआ था |

17 मेजर रामास्वामी  परमेश्वरन – मेजर रामास्वामी  परमेश्वरन  का जन्म 13 सितंबर  1946 में बंबई में हुआ था | वे 16 जनवरी 1972 को  सेना के महार रेजीमेंट मे एक अधिकारी के रूप मे नियुक्त हुए थे | श्रीलंका सिविल वार के दौरान अपनी बहादुरी के लिए मेजर रामास्वामी  परमेश्वरन को  मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था |

18 लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे – मनोज कुमार पांडे का जन्म 25 जून 1975 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के रूधा गाँव मे हुआ था | पाकिस्तान के साथ कारगिल  युद्ध के दौरान कठिन मोर्चों मे एक मोर्चा खालुबार का था जिसको जीतने के लिए उन्होने प्रतिज्ञा  करते हुए  अपनी 1/11 गोरखा राइफल्स की अगुवाई करते हुए दुश्मन से लड़ गए और जीत कर ही माने | हालांकि इस युद्ध मे उनको अपने प्राणो की आहुति देनी पड़ी | 24 वर्ष की सबसे कम उम्र मे वे देश को अपनी वीरता और हिम्मत का उदाहरण दे गए |उन्हे मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |

19 ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव – योगेंद्र सिंह यादव का जन्म 10 मई 1980 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद अहीर गाँव मे हुआ था | उनके पिता करण सिंह यादव ने 1965 और 1971 के भारत पाकिस्तान युद्धों मे भाग लेकर कुमाऊँ रेजीमेंट में सेवा की थी | योगेंद्र सिंह यादव 16 साल और 5 महीने की सबसे कम उम्र मे ही सेना मे भर्ती हो गए थे | कारगिल युद्ध  के दौरान 4 जुलाई 1999 की कारवाई के लिए उन्हे भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था | योगेंद्र सिंह यादव परमवीर चक्र प्राप्त  करने वाले सबसे कम उम्र के सैन्य अधिकारी हैं |

20 राइफल मैन संजय कुमार – सूबेदार संजय कुमार का जन्म 3 मार्च 1976 को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले मे हुआ था | सेना में शामिल होने से पहले वे दिल्ली मे टॅक्सी चलाते थे |कारगिल युद्ध मे एरिया फ्लैट टॉप  पर कब्जा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर उनको 5 जुलाई 1999 को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |

21 कैप्टन  विक्रम बत्रा – विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को पालमपुर मे हुआ था | इनके पिता का नाम जी एल बत्रा तथा माता का नाम कमलकांता बत्रा था |कारगिल युद्ध मे वीरता का परिचय देते हुए विक्रम बत्रा ज जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त  हो गए | उनको उनके मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया |

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