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लव जिहाद : मुस्लिम युवक ने हिन्दू लड़की और उसकी 9 साल की बेटी दोनों को मारकर दफ़ना दिया

दोस्तों लव जिहाद के आपने बहुत सारे मामले सुने होंगे या देखे होंगे जिसमें अधिकतर लड़के अपनी जाति और धर्म को छुपाकर, अपने असली नाम को छुपाकर किसी दूसरे मजहब की लड़की के साथ प्रेम संबंध बनाते हैं , उस लड़की से शादी रचाते हैं और बाद में उस लड़की को धोखा दे देते हैं । यहाँ तक कि कभी – कभी लव जिहाद के चक्कर में लड़कियों को अपनी जान तक गवानी पड़ती है । हालांकि लव जिहाद नाम का शब्द पहले नहीं था , पहले या तो लव होता था या फिर जिहाद होता था लेकिन आज एक दूसरे धर्म के प्रति नफरत के चलते लव जिहाद के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं ।

दोस्तों लव-जिहाद का ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में देखने को मिला है, जहां पर शमसाद नाम के एक मुस्लिम लड़के ने , प्रिया नाम की एक हिन्दू लड़की के साथ प्रेम संबंध बनाता है और उसके साथ 4 साल रिलेशनशिप में रहने के बाद अंत में उसकी हत्या कर देता है । और यह हत्या इतनी क्रूर और फिल्मी तरीके से की जाती है जिसको सुनने के बाद लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएँगे । कोई अन्य व्यक्ति तो इस प्रकार की हत्या करने के बारे में सैकड़ों बार सोचेगा उसके बाद भी ऐसे घिनौने कृत्य करने में उसके हाथ कापेंगे , लेकिन इस लड़के ने इस काम को बड़ी ही आसानी से अंजाम दे दिया और दुनिया को पता ही नहीं चलने दिया । इस लव जिहाद की पूरी कहानी मैं नीचे लिख रहा हूँ कि आखिर किस प्रकार से शमसाद और प्रिया की प्रेम कहानी आगे बढ़ी और अंत में प्रिया को मौत का सामना करना पड़ा । दोस्तों इस लव स्टोरी को हम सबसे खूनी लव स्टोरी भी कह सकते हैं ।

दोस्तों ये कहानी है प्रिया नाम की एक हिन्दू लड़की की जिसकी उम्र 30 वर्ष थी और उसकी शादी हो चुकी थी , उसकी एक बेटी भी थी जिसका नाम ‘ कशिश’ था। लेकिन उसकी शादी-शुदा जिंदगी ठीक  नहीं चल रही थी उसका तलाक हो चुका था। और प्रिया अपनी बेटी के साथ अकेली रहती थी और उसकी बेटी की परवरिश का जिम्मा भी प्रिया के ही कंधों पर था। अपनी बेटी की परवरिश के लिए प्रिया ने अपने शहर को छोड़ दिया और दूसरे शहर को चली गई, जहां प्रिया ने अपनी एक दोस्त जिसका नाम चंचल है उसकी मदद से एक ब्युटी पार्लर खोला और उसी पार्लर की कमाई से अपनी बेटी को पालने लगी। ऐसे ही ज़िंदगी ठीक ठाक से चल रही थी कि एक दिन फेसबूक के माध्यम से प्रिया की ‘अमित गुर्जर’ नाम के एक लड़के से दोस्ती हो गई । धीरे – धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई और उसके बाद उन दोनों के बीच इतना गहरा प्रेम हो गया कि ‘अमित गुर्जर’ (फेसबूक नाम) प्रिया से शादी करने के लिए तैयार हो गया । हालांकि प्रिया ने अपनी पिछली ज़िंदगी के बारे सब कुछ अमित को बताया था , और उसने अपनी बेटी के बारे में भी बताया था कि उसकी एक 9 साल कि बेटी है । इसके वावजूद भी अमित प्रिया से शादी करने के लिए राजी हो गया और उसने प्रिया को यकीन दिलाया कि वह उससे प्यार करता है और उससे शादी करना चाहता है यहाँ तक कि वह उसकी बेटी को भी अपनी बेटी की तरह से खयाल रखेगा । इतना सब कुछ सुनने के बाद प्रिया ने सोचा कि अपनी जिंदगी को सुधारने का एक मौका मिला है उसने अमित की बातों पर यकीन कर लिया और उसके साथ मेरठ चली आई । मेरठ आने के बाद अमित गुर्जर (फेसबूक नाम) ने एक किराए पर मकान लिया और मकान मालिक से उसने प्रिया और खुद को पति – पत्नी बताया और साथ में कशिश को अपनी बेटी बताया और घर लेकर रहने लगा । हालांकि वे लोग अभी तक शादी नहीं किए थे, अमित ने प्रिया को यह यकीन दिलाया था कि वे दोनों पति पत्नी हैं।  इस प्रकार प्रिया ने भी अमित पर शादी करने का ज्यादा दबाव नहीं बनाया और दोनों लिव-इन में रहने लगे । अब सब लोग खुश थे प्रिया भी खुश थी कि उसकी बेटी की देखभाल करने के लिए एक पिता मिल गया है और उसकी अधूरी जिंदगी को पूरा करने के लिए पति भी , साथ ही प्रिया का काम भी अच्छे से चल रहा था । मतलब जीवन में सब कुछ ठीक ठाक चलने लगा और धीरे धीरे समय बीतता गया ।

4 साल बीत चुके थे दोनों को एक साथ लिव – इन में रहते हुए और अब धीरे – धीरे दोनों के बीच प्यार भी कम होने लगा , दोनों में अब रुपयों पैसों को लेकर या अन्य बातों को लेकर झगड़े होने शुरू हो गए, प्यार में अब लालच भी दाखिल हो चुका था ।

अब स्थिति ऐसी बन चुकी थी कि वही अमित गुर्जर (फेसबूक नाम) जो प्रिया से बेपनाह मोहब्बत करता था वह अब प्रिया से पीछा छुड़ाना चाहता था । उसको अब प्रिया काँटों की तरह चुभने लगी थी यहाँ तक कि प्रिया को भी अमित में बदलाव दिखाई देने लगा था । लेकिन जैसे तैसे सब ठीक ठाक चल ही रहा था क्योंकि प्रिया को पता था कि एक बार वह शादी में धोखा खा चुकी है लड़ाई झगड़े तब भी होते थे शायद ऐसे ही होते होते एक दिन सब ठीक हो जायेगा।

लेकिन प्रिया के पैरों तले जमीन तब खिसक गई जब  एक दिन उसको पता चला कि जिस लड़के अमित गुर्जर से वह प्यार करती है , जिसकी साथ वह 4 सालों से रह रही है उसका असली नाम अमित नहीं शमसाद है और वह हिन्दू नहीं मुसलमान है । उसके बाद से प्रिया का सारा भ्रम ही टूट गया और वह बहुत दु:खी हुई , एक दिन उसने शमसाद से बोला कि अगर तुम मुझसे शमसाद नाम से ही मिलते और शमसाद नाम से ही प्यार करते तो भी हो सकता है कि मैं तुमसे प्यार करती लेकिन तुमने मेरे साथ इस प्रकार से विश्वास घात क्यों किया ? तुमने मेरा सारा भ्रम ही तोड़ दिया । अब प्रिया और शमसाद में पहले से और भी ज्यदा लड़ाई झगड़े होने लगे ।

इसके बाद शमसाद ने प्रिया और कशिश से पीछा छुड़ाने के लिए प्लान बनाने लगा , और उसने क्राइम पर आधारित फिल्में और वेब सिरीज़ देखना शुरू कर दिया और प्लान बनाने लगा कि आखिर किस प्रकार से वह इन दोनों से छुटकारा पाये । अब शमसाद के दिमाग में प्रिया को अपने रास्ते से हटाने के लिए प्रिया को जान से मार देना ही उचित समझा जिससे समस्या ही खतम हो जाती ।

शमसाद अभी प्रिया को मारने के बारे में सोच ही रहा था कि अचानक कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाऊन लगा दिया गया जिससे शमसाद का प्लान फ़ेल हो गया । कि आखिर वह प्रिया को मार कर कहाँ ले जाएगा चरो तरफ पुलिस का पहरा है ये सोचकर वह और भी ज्यादा परेशान रहने लगा । इसके साथ ही शमसाद के दिमाग में एक और बात चल रही थी कि अगर वह प्रिया को जान से मार देता है तो उसकी बेटी कशिश पुलिस को सब कुछ बता देगी , अब शमसाद के सामने दो जिंदगियाँ दांव पर थीं। एक तो इधर पूरे देश में लॉकडाऊन चल रहा था और उधर अमित का शमसाद हो जाने वाली सच्चाई जिसको लेकर उन दोनों में रोज झगड़े होते थे । 27 मार्च को अचानक ये झगड़े इतने ज्यादा बढ़ गए कि हाथापाई की नौबत आ गई और उसी झगड़े में गुस्से से शमसाद ने प्रिया के गले को ज़ोर से दबा दिया जिसकी वजह से प्रिया की मृत्यु हो गयी । ये सारे झगड़े 9 साल की उसकी बेटी कशिश देख रही थी और शमसाद से बोल रही थी कि वह शमसाद को छोड़ दे लेकिन शमसाद ने उसकी एक भी नहीं सुनी। अब शमसाद को डर था कि कहीं उसकी बेटी पुलिस को सबकुछ जाकर बता न दे इसलिए उसने प्रिया की बेटी कशिश का भी गला घोंट कर मार दिया और पूरा दिन अपने कमरे में दोनों की लाश के साथ बैठा रहा । उसे कुछ नहीं सूझ रहा था कि आखिर वह इन दो लाशों का क्या करें कहाँ फेंके क्योंकि उसके चरो तरफ तो लॉकडाऊन लगा हुआ था और बाहर जाना मना था।

कुछ समय सोचने के बाद शमसाद ने दोनों लाशों को चादर में लपेट कर कमरे में रख दिया और ये सोचने लगा कि इन लाशों का करना क्या है कि अचानक उसको आजय देवगन की फिल्म दृश्यम की याद आई , और फिर दृश्यम फिल्म की तर्ज पर उसने अपने बेडरूम में ही पूरी रात एक गड्ढा खोदा और उसी में उन दोनों माँ – बेटी की लाश को दफना दिया । वह बाजार से केमिकल भी खरीद कर लाया था ताकि लाश जल्दी से सड़ जाये । चूंकि लॉकडाऊन चल रहा था और कोई भी व्यक्ति कोरोना के डर से किसी के घर आता – जाता नहीं था तो उसका फायदा शमसाद को भरपूर मिला और उसने आराम से घर में ही गड्ढा खोदा और दोनों लाशों को ठिकाने लगा दिया । दोनों लाशों को दफनाने के बाद उसने उसके ऊपर बेड को विछाया और उसी के ऊपर सोने लगा और किसी को इस बात की भनक भी नहीं लगी कि आखिर उनके यहाँ चल क्या रहा है ।

अब इस मामले को हुए 4 महीने बीत चुके थे किसी को कोई खबर नहीं कि आखिर प्रिया और उसकी बेटी कशिश के साथ क्या हुआ वे लोग कहाँ गए , शमसाद भी बिंदास अपने कमरे में रहता था पुलिस को भी उसकी खबर नहीं लगी ।

इसी बीच प्रिया की जो दोस्त थी चंचल जिसकी मदद से प्रिया ने पार्लर खोला था, वह प्रिया को लेकर बहुत चिंतित रहती थी क्योंकि जब से प्रिया शमसाद के साथ रहने लगी थी तब से प्रिया और चंचल एक दूसरे से हमेशा बात-चीत किया करते थे हमेशा एक दूसरे से हाल-चाल लिया करते थे । कोई भी ऐसा दिन नहीं था जब प्रिया और चंचल एक दूसरे से बात किए बिना रहे हों । लेकिन 27 मार्च के बाद से प्रिया का फोन स्विच ऑफ रहने के कारण चंचल को चिंता होने लगी थी कि आखिर उसका फोन लग क्यों नहीं रहा है ? इसके अलावा एक दिक्कत यह भी थी कि लॉकडाऊन चंचल प्रिया के पास जा भी नहीं सकती थी क्योंकि प्रिया दूसरे शहर में रहती थी और चंचल दूसरे शहर में, और गाड़ियों का आवागमन भी बंद था । जब चंचल समसाद को कॉल करती थी वो शमसाद उससे बहाने बनाकर बचता रहता था घर से बाहर हूँ, अभी बात नहीं हो पाएगी, तरह तरह के बहाने बनाता रहता था लेकिन प्रिया के बारे में कुछ भी नहीं बताता था । ऐसे में चंचल ने अन्य जगहों से अपनी दोस्त के बारे में पता किया लेकिन कुछ भी पता नहीं चला।

4 महीने बीत चुके थे प्रिया और चंचल की बात हुए जिससे चंचल और भी ज्यादा चिंतित रहने लगी थी। उसके बाद से चंचल को शक हुआ कि प्रिया के साथ जरूर कुछ गलत हुआ है जिसकी वजह से वह मुझसे बात नहीं कर रही है अन्यथा वह मुझसे बात किए बिना नहीं रह सकती है । फिर कुछ दिनों बाद लॉकडाऊन के अनलॉक की प्रक्रिया जब शुरू हुई तब चंचल ने मेरठ जाने का फैसला किया और मेरठ पहुंची, लेकिन उसको प्रिया का घर नहीं पता था इसलिए उसने पुलिस थाने जाकर रिपोर्ट लिखवाई कि मेरी एक दोस्त है जो पिछले 4 सालों से इस शहर में रहती है लेकिन पिछले 4-5 महीने से उसका फोन नहीं लग रहा है और उससे बात नहीं हो पा रही है और मुझे डर है कि उसके साथ कोई अनहोनी न हो गई हो । लेकिन पुलिस वालों ने उसकी बात को सिरियस नहीं लिया , यहाँ तक कि एक पुलिस ऑफिसर ने चंचल को यह कह कर वापस भेज दिया कि ये लीजिये मेरा मोबाइल न॰ और मुझे रात में कॉल कीजिएगा । उस पुलिस ऑफिसर का ये रवैया देखकर चंचल एसएसपी के पास गई और वहाँ उसने सारी बातें बताई ।

चंचल की सारी बातें सुनने के बाद एसएसपी ने तुरंत एक्शन लिया, और सबसे पहले उस पुलिस ऑफिसर की खबर ली जिसने चंचल के साथ बदसलूकी किया था । उसके बाद एसएसपी ने अपनी एक टीम बनाई और चंचल की सहेली को ढूँढने में लगाया । जिसके बाद से शमसाद का पता चला लेकिन जैसे ही पुलिस की टीम ने छान – बीन शुरू किया शमसाद को पता चल गया कि उसको पुलिस ढूंढ रही है इसलिए वह कुछ दिनों तक पुलिस वालों को पैसे देकर बचता रहा और जब तक कि पुलिस उसके पास पहुँचती वह घर छोड़ कर भाग गया । लेकिन एक एनकाउंटर में उसके एक पैर पर गोली लगी और पुलिस के हाथ आ ही गया आखिर कब तक बचता । उसके बाद शमसाद से प्रिया के बारे में पूछताछ की गई । जिसके बाद शमसाद ने एक नई कहानी पुलिस को बताई कि कुछ दिन पहले प्रिया और हमारा झगड़ा हुआ जिसके चलते वह घर छोडकर चली गई उसके बाद से वह मुझसे न ही मिली है और न ही उसने मुझसे कभी बात किया है और उसका फोन भी बंद आ रहा है ।

      शमसाद  का घर जिसमें उसने प्रिया को दफनाया था

लेकिन पुलिस को उसकी कहानी में कोई दम नजर नहीं आया और पुलिस ने अपने तरीके से थर्ड – डिग्री देकर सवाल पुछना शुरू किया जिसकी वजह से वह टूट गया और सारी सच्चाई कबूल कर ली। उसने पुलिस को बताया कि मैंने तो 27 मार्च को ही दोनों माँ – बेटी को मार दिया और उनकी लाश को मेरे बेडरूम में दफना दिया । उसके बाद पुलिस की टीम उसके घर पहुंची , घर छोटा था पहले उसकी दीवारों को जेसीबी मशीन से तोड़ा गया फिर बेडरूम के फर्श की खुदाई की गई उसके बाद करीब 5 महीने पुरानी 2 इंसानी कंकाल को निकाला गया जो एक दम सड़ चुका था । और इस प्रकार से इस गुत्थी को सुलझाया गया । शमसाद को अब पुलिस हिरासत में ले लिया गया है और उसके ऊपर कानूनी कार्यवाही चल रही है ।

लेकिन अब सवाल ये आता है कि यदि चंचल न होती और उन दोनों में इतनी गहरी दोस्ती न होती तो क्या इस मामले का पता दुनिया को चल पाता ? या फिर अगल चंचल ने एक सिपाही द्वारा बदसलूकी किए जाने के बाद चंचल हाथ पर हाथ धरे बैठी रह जाती और एसएसपी से जाकर उसकी शिकायत न करती और सारे मामले को नहीं बताती तो क्या पुलिस इस घटना के तह तक पहुँच पाती ? बिलकुल भी नहीं । इसलिए कहा जाता है कि इस दुनिया में बहुत सारे दोस्त ना बनाओ बस एक दोस्त बनाओ जो आपको हर कदम पर साथ देने के लिए तैयार रहे जो आपके सुख और दु:ख सभी में बराबर का भागीदार हो । बिलकुल चंचल की तरह जिसने अपनी सहेली की परेशानी के दिनों में भी सहायता की और उसके मरने के बाद भी अपनी सहेली के खूनी तक पहुँच कर उसको सजा भी दिलवाया।

अमित बनकर शमसाद प्रिया की जिंदगी में आया उसने अपनी जाति छुपाई , अपनी मज़हब को छुपाया , प्रिया के विश्वास को जीता और अंत में उसने प्रिया के साथ विश्वासघात करके माँ बेटी दोनों का कत्ल कर दिया । इस पूरी घटना में एक चीज विचारणीय है कि जिस प्रिया ने शमसाद पर इतना भरोसा किया उसी के साथ इतना बड़ा धोखा हो गया । हालांकि प्रिया का इसमें कोई दोष नहीं था क्योंकि वह बेचारी खुद हालातों की मारी हुई थी , उसका खुद एक बार तलाक हो चुका था उसके पास एक बेटी भी थी , आखिर अपनी बाकी की ज़िंदगी को लेकर वह कहाँ जाती इसलिए शायद उसने सब कुछ सोचकर उसने अमित (शमसाद) पर भरोसा किया लेकिन उसको कहाँ पता था कि जिस व्यक्ति पर वह भरोसा कर रही है उसकी सच्चाई ही कुछ और है । खैर जो हुआ सो हुआ लेकिन मेरा एक सवाल उन लड़कियों से हैं जो बिना सोचे समझे बिना जान पहचान के शोसल मीडिया के माध्यम से लोगों पर भरोसा कर लेती हैं । इसके अलावा अगर उसने किसी अंजान व्यक्ति पर सोशल मीडिया के जरिये भरोसा कर भी लिया तो उनकी पारिवारिक स्थिति जाने बिना ही उनके साथ रहने के लिए तैयार कैसे हो जाती है । ऐसे में मेरा उन लड़कियों से को एक ही सलाह है कि यदि जीवन में कभी भी किसी अंजान व्यक्ति पर भरोसा करो और उसको अपना जीवन साथी बनाओ तो सबसे पहले उसके जीवन की सारी सच्चाईयों का पता जरूर लगाओ कि आखिर वह व्यक्ति कैसा है, कहाँ से है ? किस जाति का है किस मज़हब का है । ये सारी बातें तभी जाकर उसपर भरोसा करो , और ऐसा करने के बाद ही आपका जीवन हंसी खुशी से व्यतीत हो पाएगा ।

 

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Updatewala Team

The Founder Of Updatewala a leading author and specializing in political, religious, and many more things

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