सनातन धर्म

राम ने बालि को पेड़ के पीछे छिपकर क्यों मारा

हम सबने रामायण देखी या पढ़ी जरूर होगी चाहे वह टीवी हो किताब हो या विभिन्न मीडिया स्त्रोत हों किसी न किसी माध्यम के द्वारा हम रामायण की कहानी को जरूर जानते हैं । हम यह भी जानते हैं कि भगवान राम ने बालि को तीर मारा था । लेकिन लोग इस पर सवाल करने लगते हैं कि भगवान ने बालि को छिपकर क्यों मारा ? क्या सामने से नहीं मार सकते थे ? और उन्होने ने बालि को मारा ही क्यों आखिर उसने उनका क्या बिगाड़ा था ? आज हम इन्ही सब सवालों के जवाब बताएँगे ।

दोस्तों ऐसे सवाल सिर्फ वही बुद्धिजीवी लोग करते हैं जो राम को काल्पनिक बताते हैं या जिनको भगवान पर भरोसा नहीं होता है क्योंकि अगर जिनको भरोसा होता तो वे लोग ऐसे सवाल करते ही नहीं । वे लोग अक्सर पुछते हैं कि भगवान इतने महान थे बलशाली थे जो उनको बालि को मारने के लिए पेड़ के पीछे छिपने कि क्या आवश्यकता थी क्या वे बालि से सामने से युद्ध नहीं कर सकते थे ? तो आज हम आपको इस लेख में इन्ही सब सवालों के जवाब देने वाले हैं।

दोस्तों आज समाज में यह धारणा बन गयी है , यह मिथ्या फैल गयी है कि भगवान राम ने बालि को छल से मारा उसको राम के बारे में नहीं पता थी लेकिन ऐसी बात नहीं है बाल्मीकी रामायण के अनुसार बालि को राम के बारे में पता था क्योंकि जब सुग्रीव बालि को युद्ध के लिए ललकार रहे थे तब बालि की पत्नी तारा ने बालि को बाहर जाने से माना किया था , उसने बालि से बोला कि आप गुफा से बाहर मत जाइए क्योंकि सुग्रीव के साथ जरूर कोई है जिसके बल पर वह आपको इतना ललकार रहा है क्योंकि अगर वह अकेला होता होता तो वह ऐसा कभी नहीं करता। लेकिन बालि ने तारा की एक भी बात नहीं मानी और सुग्रीव से युद्ध के लिए गुफा से बाहर आ गया ।

जब बालि और सुग्रीव युद्ध कर रहे थे तब भगवान श्री राम उनके युद्ध को वृक्ष कि आड़ से देख रहे थे । सुग्रीव ने बालि को हराने के लिए बहुत से छल बल किए लेकिन सफल सफल नहीं हुआ और अंत में भय मानकर हृदय से हार गया जिसके बाद श्रीराम ने बाण सीधा बालि की छाती मे मार दिया, और बाण लगते ही बालि व्याकुल होकर धरती पर गिर पड़ा लेकिन भगवान राम को सामने आता हुआ देखकर फिर से उठ बैठा । भगवान राम के श्याम शरीर , सिर पर जटा ,लाल नेत्र और तीर धनुष लिए हुए रूप को देखकर वह समझ गया कि वह जरूर भगवान के हाथों मरा है और उनके चरणों में अपना चित्त लगा दिया और अपने जीवन को सफल माना , उसके हृदय मे भगवान के प्रति स्नेह था लेकिन फिर भी उसके मुख पर कठोर शब्द थे और उसने राम जी को अपनी ओर आता देख उनसे पूछा —-

हे गोसाई आपने धर्म कि रक्षा के लिए अवतार लिया है और मुझे एक शिकारी कि तरह छिपकर मार दिया ? मैं बैरी और सुग्रीव प्यारा ? हे नाथ किस दोष के कारण आपने मुझे मारा ? आपको वीरों कि तरह मुझसे युद्ध करना चाहिए था न कि ऐसे छुपकर मारना चाहिए था। तुमने मेरी बिना किसी कारण के हत्या की है ।

तब प्रभु श्री राम बोले – हे वानर राज! आज मरने वाले हो तो तुम्हें धर्म याद आ रहा है सत्कर्म याद रहा है आज तुम नीतियों की बात कर रहे हो । अपने जीवन में इन नीतियों और विचारों का उपयोग तुमने तनिक भी नहीं किया । धर्म , अर्थ , काम , और लौकिक सदाचार तुम खुद ही नहीं जानते हो । आचार्यों द्वारा धर्म के सूत्रों को ठीक – ठीक जाने बिना ही मुझे धर्म का उपदेश देना चाहते हो ?

मेरी निंदा करते समय तुम एक अबोध बालक कि भांति दिखाई देते हो । तुम खुद चपल और चंचल चित्त वाले हो , अजितात्मा वानर तुम्हारे मंत्री हैं । जिस तरह एक अंधा दूसरे अंधे को रास्ता दिखाता है वैसे ही तुम्हारे चपल मंत्री भी तुम्हें परामर्श देते हैं । फिर तुम धर्म का विचार कैसे कर सकते हो ?  धर्म के सूक्ष्म स्वरूप को कैसे समझ सकते हो ? धर्म की बात तो छोड़ो अपने बल के घमंड में तुमने सामान्य लौकिक व्यवहार का भी आचार विचार जभी नहीं किया है ।

बड़ा भाई , पिता और गुरु तीनों एक जैसे पूज्यनीय हैं । इसी प्रकार छोटा भाई , पुत्र और शिष्य एक समान माने गए हैं ।

हे मूर्ख! सुन , छोटे भाई कि पत्नी , बहन , और पुत्र की पत्नी और तुम्हारी खुद की कन्या ये चारों एक समान माने गए हैं । इनको जो बुरी दृष्टि से देखता है उनको मारने में कोई पाप नहीं होता है , लेकिन तुमने कभी भी किसी भी मर्यादा का कोई पालन नहीं किया है । अपने भाई सुग्रीव के साथ अन्याय करके बिना किसी दोष के तुमने उसे भगा दिया और उसके जीते जी उसकी पत्नी को अधर्म और अनीति से तुमने अपनी पत्नी की तरह उसे अपने अधीन रखा । और ऐसे व्यक्ति का वध करना ही उसके लिए उपयुक्त दंड माना गया है ।

बालि ने पूछा – अगर ये मेरा पाप भी था तो दंड देने का अधिकार केवल राजा को होता है । तुम्हें क्या अधिकार था न्याय करने को मुझे दंड देने को ?

श्रीराम जी बोले – अहंकारी वानर तुम्हें ये पता होना चाहिए कि ये सारी पृथ्वी इक्ष्वांकु वंश के राजाओं की है । इस समय इक्ष्वांकु वंश के राजा भरत हैं । उन्ही की आज्ञा का पालन करने वाला और पवित्र इक्ष्वांकु वंश का वंशधर होने के नाते मेरा मेरा यह अधिकार है कि यहाँ के पशु पक्षी , नर वानर , सबके प्रति दया का भाव रखने अथवा दंड दे सकता हूँ । धर्मात्मा राजा भरत इस पृथ्वी का पालन करते हैं और उनके रहते कोई भी प्राणी धर्म के विरुद्ध आचरण नहीं कर सकता । इसलिए हम सब उन्ही कि आज्ञा से श्रेष्ठ धर्म में स्थिर रहकर तुम जैसे लोगों को विधिवत दंड देते हैं । बालि सत्पुरुषों का धर्म अति सूक्ष्म होता है । इसे समझना बड़ा कठिन है इतना समझ लो कि राजा यदि पापी को दंड दे तो पापी उस दंड को भोगकर निष्पाप हो जाता है , परंतु यदि राजा पापी को उचित दंड न दे तो उस दंड का फल राजा को भुगतना पड़ता है । इस प्रकार तुमने जो पाप किए हैं उसके अनुसार तुम्हारा वध धर्म के अनुसार सर्वथा उचित माना जाएगा ।

बालि ने कहा – प्रभु मैं अहंकार में चूर हो गया था मेरी अंतरात्मा के नयन खुल रहे हैं । अगर मैंने आपको कुछ अनुचिता बोला हो तो मुझे क्षमा करें । श्रीराम ने कहा – प्रायश्चित तो तुम्हारा दंड पाने से ही हो गया अब तुम निष्पाप हो गए हो अगर तुम चाहो तो मैं तुमको अभी ठीक कर सकता हूँ ।

बालि ने बोला कि – प्रभु अब जीवन किस लिए ? जीवन तो बार बार मिल जाएगा परंतु ऐसी मृत्यु फिर नहीं मिलेगी । इस प्रकार भगवान राम ने बालि को मारा नहीं बल्कि उसके जीवन को तारा है ।

अब प्रश्न आता है कि आखिर भगवान ने पेड़ के पीछे छिपकर ही बाण क्यों चलाया ?

दोस्तों प्रभू श्रीराम को पेड़ के पीछे छिपकर बाण चलाने का मुख्य कारण यह था कि बालि को उसके धर्म पिता इंद्र से यह वरदान प्राप्त था कि जो व्यक्ति उससे लड़ने के लिए उसके सामने जाएगा तो उसकी आधी शक्ति बालि के शरीर अंदर चली जाएगी। ऐसे में अगर प्रभू श्रीराम बालि के सामने जाते तो उनकी भी आधी शक्ति बालि के शरीर में चली जाती, लेकिन सबको यह पता होनी चाहिए कि प्रभू राम के पास अनंत शक्तियाँ थी और अनंत का आधा अनंत ही होता है। और भगवान के अलावा अनंत शक्तियाँ किसी और के पास नहीं हो सकती ऐसे में भगवान के पास दो चुनौतियाँ थी एक तो यह कि उनको बालि का वध करना है जिसका उन्होने सुग्रीव से वादा किया था । और दूसरी बात यह कि वे भगवान इन्द्र द्वारा दिये गए वरदान की अवहेलना भी नहीं कर सकते थे । ऐसे में उनको वृक्ष के पीछे छुपकर बाण चलाना पड़ा।

 

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Updatewala Team

The Founder Of Updatewala a leading author and specializing in political, religious, and many more things

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