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आर्टिकल 30 क्या है , और भारतीय संविधान के अनुसार इसका महत्व क्या है

दोस्तों भारत एक धर्म निरपेक्ष राज्य है यह तो हम सभी जानते हैं और यहाँ सभी धर्मों का सम्मान भी किया जाता है । इसके साथ ही सभी प्रकार के धर्म और पंथ के लोगों को एक समान अधिकार भी प्राप्त हैं । और इन सभी धर्मों को एक समान अधिकार ही हमें अन्य  देशों से अलग भी बनाता है । भारत मुख्य रूप से हिन्दू बाहुल्य राष्ट्र है लेकिन इसके बावजूद भी यहाँ सभी धर्मों को एक समान अधिकार दिये जाते हैं जिसका बाहुल्य हिन्दू समाज आज तक समर्थन भी करता आया है और आगे भी करता रहेगा । भारतीय संविधान के भाग तीन में अनुच्छेद 30 ( Article 30 ) का वर्णन किया गया है जिसमे सभी धर्मों की समानता और उनके अधिकारों के बारे में बताया गया है । खासकर यह अनुच्छेद अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को दर्शाता है ।

आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी कि राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजय वर्गीय ने 28 मई को एक ट्वीट करके संविधान के इस आर्टिकल 30 पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया है । और उन्होने अपने इस ट्वीट में यह लिखा है कि—

‘’ देश में संवैधानिक समानता के अधिकार को आर्टिकल 30 सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है । ये अल्पसंख्यकों को धार्मिक प्रचार और धार्मिक शिक्षा की इजाजत देता है । जो बहुसंख्यक समुदाय के लोगो को यह अधिकार प्राप्त नहीं है । जब हमारा देश धर्मनिरपेक्षता का पक्षधर है तो फिर हमारे देश में आर्टिकल 30 कि जरूरत क्यों है ? ‘’

आपको बता दें कि कैलाश विजय वर्गीय इस प्रकार के बयान हमेशा देते रहते हैं और इन बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं । आइये आज हम जानते है कि अनुच्छेद 30 क्या है —

 क्या है आर्टिकल (30 What Is Article 30)

इस आर्टिकल 30 के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के पास उनके स्थापित शैक्षिक संस्थानो का व्यक्तिगत नियंत्रण होता है और उस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है, और अल्पसंख्यकों के इसी विशिष्ट अधिकारों का संरक्षण करता है आर्टिकल 30 । इस अनुच्छेद के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अपनी पसंद के मुताबिक शैक्षिक संस्थानो जैसे मदरसे , या स्कूल खोलने का अधिकार है । इसके अलावा इस अनुच्छेद के अनुसार देश की सरकार धर्म या भाषा को आधार मानकर किसी भी अल्पसंख्यक समूह द्वारा चलाये जा रहे शैक्षिक संस्था को वित्तीय मदद करने से नहीं रोक सकती । कुल मिलकर अगर देखा जाये तो यह अनुच्छेद अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अपना खुद का एक शैक्षिक संस्थान बनाने और उसको संचालित करने का अधिकार देता है इसके अलावा उन संस्थानो पर सरकार का कोई अधिपत्य नहीं होगा साथ ही साथ सरकार उस संस्था को वित्तीय सहायता  भी करेगी । इसके अलावा अगर कोई राज्य सरकार कभी उस संस्थान को अपने अधिग्रहण में लेना चाहती है तो राज्य सरकार उस संस्था को संचालित करने वालों को मुआवजा देगी और वही भी मुआवजा इस प्रकार होगा कि अल्पसंख्यकों को संविधान द्वारा द्वारा जो अधिकार मिलें हैं उस अधिकार में कोई फर्क ना आए । जब वह राज्य सरकार उन लोगों को मुआवजा या सहायता देगी तो उन लोगों के साथ जाति भाषा और धर्म के अनुसार भेदभाव नहीं करेगी ।जबकि बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को ये सारी सुविधाएं नहीं मिलती हैं । आज यही कारण है कि भारत में संविधान के इस अनुच्छेद 30 ( Article 30 ) के ऊपर सवाल उठ रहे हैं ।  भारत में 27 जनवरी 2014 के भारत के राजपत्र में मुस्लिम , सिक्ख , ईसाई , जैन , पारसी और बौद्ध समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यक समुदाय का सदस्य माना जाता है ।

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Updatewala Team

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